देखा

जीते जी इंसानों में नफरत देखा
मरने के बाद तो आंखों में मोहब्बत देखा
नजरों में पलते ख्वाबों को देखा
हकीकत के पन्नों पे सपनों को बिखरते देखा
लवों पे कटारी सा वार देखा
दिलों में चाहतों का अंबार देखा
ख्वाहिशों के दर पे अरमानों का बारात देखा
इच्छाओं की कश्ती को गमों के सागर में डूबते देखा
उजालों के जलते दिए को बुझते देखा
रातों के अंधेरे में तनहाई के जलते चिराग देखा

क्या हुआ

ख्वाहिशें अधूरी है तो क्या हुआ
जीने की तलब तो अब भी है
राहें खो गई तो क्या हुआ
मेरे क़दम तो साथ है
नहीं कोई उम्मीद रौशनी की
मेरे दुनिया में चांदनी की रात तो है
रूठी हुई नसीब है तो क्या हुआ
मेरे हाथों की लकीर तो मेरे पास है
चन्द दिन की जिन्दगी है तो क्या हुआ
मुस्कुराकर जीने में क्या रखा है
नफरतों की आग जला है तो क्या हुआ
प्रेम के फूल लवों पर खिल तो रहे हैं
मंजिल खो गई तो क्या हुआ
रास्ते तो अब भी मेरे साथ है
सूरज की किरणें ढल गई तो क्या हुआ
आशाओं के दिए जले तो है
पीछे रह गए तो क्या हुआ
हमें भी तो दौड़ लगाना आता है
थोड़ी देर ठहर ही गए तो क्या हुआ
कांटों से लड़ना सीखा तो है
अपनों के चोट से जख्मी हुए तो क्या हुआ
दर्द को अपना दवा बनाया तो है
इबादत अधूरी है तो क्या हुआ
मेरा खुदा तो मेरे पास है
दिल टूटकर बिखरा है तो क्या हुआ
मेरी धड़कने खामोश तो नहीं है
किस्मत के पन्ने कोरे हैं तो क्या हुआ
लिखना मुझे भी तो आता है
कोई नहीं है अपना तो क्या हुआ
मेरे साए तो मेरे साथ हैं

दादा जी

राजू-दादा जी आप ये पेड़ो को रोज पानी क्यूं देते है इन पेड़ों को पानी देने से हमें क्या फायदा होगा।

“”दादा जीराजू की बातें सुनकर बहुत प्रसन्न हो जाते है-राजू मैं तुमको सारि बात बताता हूँ जैसे ही दादा जी राजू के नटखट सवालों का जवाब देने को आतुर होते है तभी राजू के पिता जी राजू को स्कूल ले जाने के लिए बुला लेते है-

राजु चलो स्कूल।दादा जी को पेड़ो को पानी देने दो।
पापा दादा जी रोज पानी पेड़ो को देते है आप क्युं पानी नहीं देते।राजू तुम स्कूल जाओ बकवास की बातें मत करो।
राजू जाओ पहले तुम स्कूल से होकर आना तब तुमको मैं सारी बात बताऊंगा।हेराम मैं तो थक गया।
जब थक जाते हो थोड़ी सी भी काम करने में तो क्युं पेड़ो को पानी देते हो छोड़ दो वो पेड़ है इंसान थोड़ी ना जो वो पानी के बगैर मर जाएंगे।अरे तुम कैसी बातें कर रही हो पेड़ है तभी तो हम सब है।ये सब बेकार की बातें है इन सभी बातों को छोड़ो ये पानी लो दवा खालो।तुमको क्या समझाऊं मेरी बातें बकवास ही लगेगी।

स्कूल के क्लास में मास्टर जी बच्चों को पेड़ के महत्व के बारे में समझाते है,,मास्टर जी की बातें सुनकर राजू मास्टर जी से एक सवाल करता है-सर इन पेड़ो से हमें मिलता क्या है जो आप पेड़ो की सुरक्षा की बातें कर रहे है।
राजू की बातें सुनकर मास्टर जी हंस पड़ते है-राजू जो सवाल तुमने पूछा है उस सवाल का उत्तर तुमको समझाता हुं,पेड़ों से हमें ऑक्सीजन मिलता है जिसकी वजह से हम और तुम सांसें ले पा रहे हैं पेड़ो से जल मिलता है,फल मिलता है,छांव मिलता है।

राजू मास्टर जी की बातें सुनकर कहता है-मेरे दादा जी पेड़ लगाते है और पेड़ो को रोज पानी देते है।
वाह राजू तुम्हारे दादा जी तो बहुत अच्छे है,,अच्छा तो बच्चो घंटी बज चुका है स्कूल की छुट्टी हो चुका है अब चलता हुं।

राजू घर पहुंचते ही दादा जी की तलाश में जुट जाता है दादा जी को सारी रूम में ढूंढ़ लेता है किन्तु दादा जी का कुछ पता नहीं चलता है।

अरे राजू किसको ढूंढ़ रहे हो?
क्या बताएं दादी,दादा जी का कुछ पता नहीं चल रहा कहाँ गए?
जानते हो ना राजू?तुम्हारे दादा जी के पास कोई काम तो है नहीं मार्केट गये होंगे पेड़ लेने।
राजू तुम आ गए चलो फ्रेश होकर घर के कपड़े पहन लो,खाना भी खालो।
चलो मां,मैं फ्रेश होकर आता हुं खाना खा लेता हुं।

दादा जी अपनी स्कूटी को बाहर खड़ा करके,पेड़ को बगीचे में ही रख देते है।
दादा जी-राजू,राजू,,अरे क्युं चिल्ला रहे हो,राजू होगा घर में।दादा जी तुम चुप रहो,राजू बाहर चलो देखो मैं क्या लेकर आया हुं।
राजू-मैं आया दादा जी।
दादा जी जो पेड़ लाये थे एक हाथ में फावड़ा लिए,एक हाथ में पेड़ लिए,पेड़ को जमीं पर रखकर फावड़े से जमीन को खोद लेते है।
राजू खड़ा होकर देख रहा है-दादा जी ये कौन सा पेड़ है जो आप लगा रहे हो।
दादा जी-राजू,ये पेड़ पीपल का है।
राजू-दादा जी इस पेड़ को लगाने से क्या फायदा होगा।
दादा जी-राजू ये पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता है इस पेड़ को लगाने से सबसे ज्यादा फायदा होता है,राजू मैं पेड़ को गढे में डाल रहा हुं तुम मिट्टी डाल दो¡
राजू-जी दादा जी।
दादा जी-पेड़ तो लगा दिया राजू अब चलो हाथ धो लेते है।दादी जी-ये सब क्या सीखा रहे हो,राजू को।
अरे भाग्यवान मैं इसको अच्छी चीज सीखा रहा हुं,अभी से पेड़ो की सुरक्षा की बातें सिखाऊंगा तभी तो इसका कल बेहतर होगा।
दादा जी बिल्कुल सही कह रहे है दादी।

दादी जी राजू के कान को पकड़कर कहती है हां दादा जी के दुलारे बहुत ज्यादा बातें करने लगे हो तुम।

दादी कान छोड़ो दर्द कर रहा है।
लो छोड़ दिया।
राजू अपने दादा जी के गोद में बैठकर स्कूल की सारी बातें बताने लगता है,,दादा जी मास्टर जी ने मुझे पेड़ो की सुरक्षा की बातें बताई।
बहुत अच्छा राजू।
दादा जी जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तो ढेर सारे पेड़ लगाऊंगा।हां राजू लगाना,तुम सुबह मुझसे कुछ पूछ रहे थे पेड़ों को पानी देने से क्या फायदा होगा,पेड़ों को पानी देंगे तभी ये पेड़ हमें गर्मियों के मौसम में छांव देंगे।

राजू दादा जी से बातें करते हुए सो जाता है दादा जी राजू को गोद में लिए उसके कमरे में उसकी मम्मी को दे आते है।दादा जी अपने कमरे में जाकर कुर्सी पर बैठ जाते है तभी दादा जी को चक्कर आ जाता है और वो कुर्सी से फर्श पर गिरकर बेहोश हो जाते है।
दादी जी-क्या हुआ आपको उठिये,,अरे बेटा संतोष जल्दी चल तेरे बाबू जी फर्श पर बेहोश पड़े हुए है,संतोष दौड़ते हुए अपने पिता जी के कमरे में चला जाता है।
दादा जी के चेहरे पर पानी की छींटे मारते हैं फिर भी दादा जी होश में नहीं आ पाते।
मां बाबू जी की धड़कन तो चल रहि है नब्ज भी चल रहा है सांसें भी ले रहे है।
बेटा जल्दी एम्बुलेंस को बुला हॉस्पिटल ले चल अपने बाबू जी को।
रीमा-हां मां जी आप ठीक कह रही है एम्बुलेंस को फौरन बुलाइये।

संतोष के फ़ोन करने के 20 मिनट में एम्बुलेंस आ जाता है संतोष और दादी जी एम्बुलेंस में बैठ जाते है,दादा जी को लिए एम्बुलेन्स हॉस्पिटल लेकर चला जाता है संतोष स्ट्रेचर पर लिए डॉक्टर को दिखाते है डॉक्टर ने तुरन्त ही दादा जी को भर्ती होने की सलाह देते है।

वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है दादा जी को दवा भी चढ़ाया जाने लगा।
संतोष,डॉक्टर साहब कुछ बताएंगे तुम्हारे बाबू जी को अभी तक होश क्युं नहीं आया।
संतोष-डॉक्टर साहब क्या हुआ है मेरे बाबू जी को।
बता रहे है संतोष जी पहले सिरिंज तो लगाने दीजिये।
कुछ तो बताइये डॉक्टर साहब हुआ क्या है बाबू जी को।लापरवाही की वजह से आपके बाबू जी का सेहत थोड़ा गड़बड़ हो चुका है 3 चार दिन बाद छुट्टी मिल जाएगा।

दादा जी को दवा चढ़ने के दो घंटे बाद दादा जी को होश आता है।संतोष टेबल पर बैठे हुए अपने बाबू जी के पास बेड पर सोया रहता है।
संतोष मैं तो घर पर था हॉस्पिटल में कैसे आ गया?
आपको होश आ गया बाबू जी?
क्या बकवास कर रहे हो संतोष मैं बेहोश कब हुआ।
मां से ही पूछ लो बाबू जी,आप अपने कमरे में बैठे थे तभी आपके कमरे में कुछ गिरने की आवाज सुनी जब कमरे में पहुंची तो देखा आप फर्श पर बेहोश पड़े थे एम्बुलेंस से संतोष लेकर हॉस्पिटल ले आया।
हैल्लो संतोष बाबू जी जी कैसे है।
ठीक है रीमा बाबू जी को होश आ चुका है और दवा चढ़ रहा है।
कब छुट्टी मिलेगा हॉस्पिटल से।
3 दिन में छुट्टी हो जाएगा।
कोई और बात तो नहीं है।
डॉक्टर ने बताया लापरवाही की वजह से ऐसा हुआ है,फ़ोन रखो राजू का ख्याल रखना कल सुबह मैं आऊंगा बाबू जी को खाना लेने।
अच्छा फोन रख रही हुं।

सुबह होते ही राजू दादा जी की तलाश करने लगता है जब दादा जी का कहीं पता नहीं चलता है तो राजू परेशान होकर बैठ जाता है-अपनी मां से दादा,दादी के बारे में पूछता है मां दादा,दादी जी कहाँ गए कुछ पता नहीं चल रहा।
राजू दादा,दादी जी कल रात को,जब तुम सो गए तो फूफा जी आये थे वो ही दादा,दादी को कुछ दिन अपने घर पर लेकर चले गए।
अफसोस जताते हुए दादा जी कहते है-हे राम अब क्या होगा,मैं तो 3 दिन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हो गया पेड़ो को पानी कौन देगा।
आपको अपने सेहत की चिंता नहीं है,पेड़ो की पड़ी है आपको।
अरे भाग्यवान पेड़ भी तो इंसान ही होते है।
गुस्से में दादी जी दादा जी को कहती है-आपको बहस में कोई नहीं पायेगा।

सुबह हो चुका है,संतोष अपने मां बाबू जी को दो गिलास चाय पीने को देने के बाद,,घर पर खाना लेने के लिए चला जाता है।

रीमा-आप आ गए बाबू जी कैसे है।
क्या बताएं रीमा बाबू जी ठीक है अभी दवा नहीं चढ़ रहा है जब खाना लेकर जाऊंगा,उसके बाद दवा खरीद कर आएंगे तो चढ़ेगा,राजू कहाँ है बाबू जी को पूछ तो नहीं रहा था।

रीमा-बड़ी ही मुश्किल से बहकाया है,दादा,दादी जी फूफा जी के घर गए हुए है।
अच्छा किया तुमने अगर राजू को पता चल जाता तो वो हॉस्पिटल जाने की जिद्द करता,देखूं तो राजू क्या कर रहा है।
राजू बगीचे में पाइप से पेड़ों को पानी दे रहा है।
बेटा तुम ये क्या कर रहे हो,स्कूल नहीं जाना है क्या तुमको।
राजू-जाऊंगा पापा पहले पेड़ो को पानी तो दे दुँ,दादा जी नहीं है तो पेड़ों को पानी मैं ही दूंगा।
दादा जी-जरा राजू से बात करा दो उसकी बहुत याद आ रहा है।
दादी-हैल्लो बहु राजू से कह दो दादा जी बात करना चाहते है।
रीमा-बात करा रही हुँ मां जी,मां जी राजू से मत बताना की उसके दादा जी हॉस्पिटल में है उसको मालूम नहीं है मैंने कह दिया है आप दोनो उसकी बुआ के घर गए हुए है।
दादा जी-जल्दी बात कराओ क्या सास बहु बकवास करने लगी।
दादी-लीजिये फ़ोन लेकिन राजू पूछे की आप कहाँ है तो बता दीजियेगा बुआ के घर पर गए है।
रीमा-राजू लो दादा जी से बात कर लो फ़ोन आया है।
अरे बेटा थोड़ा से नास्ता बचा है खा लो।
खा लूंगा पापा दादा जी से बात तो कर लूं।
राजू-प्रणाम,दादा जी आप बुआ के घर क्युं चले मुझे बताये बिना,दादी भी बिन बताये बुआ के घर चली गयी।
दादा जी-क्या बताएं राजू अचानक ही तुम्हारे फूफा जी आये मुझे और तुम्हारी दादी को घर ले जाने के लिए कहने लगे,,तुम सो गए थे इसलिए बिन बताये चल आये,तुम्हारे फूफा के साथ,मुझे और अपनी दादी को माफ कर दो।
राजू-माफ कर दिया,जानते हैं दादा जीमैंने आज क्या किया सुबह उठते ही पेड़ों को मैंने पानी दिया।
दादा जी-वाह राजू तुमने तो बहुत अच्छा काम किया।
राजू-देखियेगा दादा जी इस बार मैं अपना स्पेशल बर्थ डे मनाऊंगा।
राजू अब फोन मम्मी को दो चलो स्कूल की वैन आ चुकी है तुमको बैठा दु।
राजू-अच्छा दादा जी में स्कूल चलता हुँ बाय।
दादी जी-अच्छा तो बहु फोन रख रही हुँ राजू का ख्याल रखना,,क्युं रो रहे हैं एक तो सुगर की बीमारी पहले से ही है आपपेड़ो की देंन है जो आज आप होस्पिटल में भर्ती है पेड़ो की वजह से ना खाते थे टाइम से न दवा खाते थे,,,,
दादा जी-जो हुआ सो हुआ तुम फिर क्युं चिल्लाने लगी।
दादी जी-आपको छुट्टी तो मिल जाए घर जाने पर सारा बगीचा ही कटवा दूंगी ना बांस रहेगी और ना बजेगी बांसुरी।
दादा जी-ऐसा मत करना भाग्यवान मैं हाथ जोड़ता हुँ तुम्हारी।
क्या हुआ बाबू जी आप दोनों के बीच में फिर कहासुनी होने लगी।
बेटा देखो तुम्हारी मां क्या कह रही है,कह रही जब मैं घर जाऊंगा तो ये सारे पेड़ कटवा देगी।
मां बिल्कुल सही कह रही है अब आपकी मनमानी नहीं चेलगी,ये लीजये खाना मैं अभी कार्ड पर लिखा हुआ दवा लेकर आता हुं।
राजू स्कूल से आते ही अपनी मां से कहता है मां बर्थ दे है परसों मेरा मैं बर्थ डे नहीं मनाऊंगा।
ऐसे उदास क्युं हो राजू तुम अपना बर्थ डे क्युं नहीं मनाओगे।
मां दादा जी बुआ के घर से नहीं आये तो।
अरे मेरे बेटा ऐसे उदास नहीं होते दादा जी आ जाएंगे।
बेटा डॉक्टर से बात कर लो जल्दी छुट्टी मिल जाता तो अच्छा होता राजू का बर्थ डे है परसों।
हां बात कर लूंगा।
डॉक्टर साहब बाबू जी को जल्दी छुट्टी मिल जाता तो अच्छा होता।
फिलहाल आज का जांच रिपोर्ट आ जाने दीजिये फिर बताएंगे छुट्टी कब मिलेगा।
जी डॉक्टर साहब।
बेटा डॉक्टर ने क्या बताया।
रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताएंगे।
मां मोबाइल दो दादा जी से बात कर लुं।
लो बेटा दादी को फोन लगा दिया है बात करलो
दादी मैं राजू बोल रहा हुँ।
बोलो मेरे लाल तुम कैसे हो।
मैं ठीक हुँ दादी आप और दादा जी कैसे है।
लो दादा जी से बात कर लो,
हां राजू कैसे हो।
ठीक हुँ दादा जी,मेरा बर्थ डे आने वाला है आपको याद है।
हां राजु याद है मैं बर्थ डे में रहूंगा राजू।
लो मां तुम बात कर लो दादा जी से।
क्या हुआ राजू।
पापा राजू मुंह फुलाये बाहर चला गया।पापा आपकी तबियत कैसा है।
ठीक है बहु।
छुट्टी कब मिलेगा पापा आपको हॉस्पिटल से।
रिपोर्ट देखकर डॉक्टर बता देंगे कब छुट्टी मिलेगा।
अच्छा बहु फोन रखता हुँ रिपोर्ट आ चुका है।
बेटा रिपोर्ट आ गया जाकर डॉक्टर को दिखा दो।
रुकिए पापा पहले देख लूं केबिन में डॉक्टर साहब है या नहीं।
क्या हुआ बेटा डॉक्टर साहब अभी अपने केबिन में है नहीं जब आ जाएंगे तब रिपोर्ट ले जाकर दिखा दूंगा।
मां मेरे साथ चलोगी मार्किट पेड़ खरीदने।
बेटा पापा के साथ चले जाना।
नहीं मां तुम चलो मेरे साथ पापा के साथ जाऊंगा तो पापा पेड़ भी नहीं खरीदेंगे मुझको डांटेंगे भी।
बेटा जबरदस्ती मत करो घर के काम करने दो राजू अपनी मां की बातें सुनकर उदास होकर दादा जी के कमरे में बैठ जाता है उसकी मां भी राजू के पीछे पीछे चली आती है राजू कहता है अगर दादा जी होते तो मेरे साथ जरूर चलते मार्किट पेड़ खरीदने।
राजू जाओ तुम तैयार हो जाओ तब तक मैं घर के सारे काम निपटा दुँ।
अच्छा मां।
राजू की मां राजू को लेकर घर से बाहर निकलती है दरवाजे को बन्द कर देती है चलो राजू।
जाने दो मां आज नहीं जाऊंगा बर्थ डे वाले दिन जाऊंगा दादा जी के साथ।
तब मुझे बेमतलब का परेशान कर दिया,दादा जी के साथ ही जाना।
बेटा कहाँ चले गए थे मैंने नर्स से पूछा की डॉक्टर साहब आ गए है नर्स ने बताया डॉक्टर साहब केबिन में बैठे हुए है।
जाता हुँ बाबू जी मां रिपोर्ट कहाँ है।
बेटा ड्रॉर में रख दिया है निकाल लो।
रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास चले गए डॉक्टर साहब ने रिपोर्ट देख लिया।
डॉक्टर साहब रिपोर्ट कैसा है रिपोर्ट तो बता रहा है 99% तक आपके पिता की हेल्थ ठीक है कल दोपहर 3 बजे छुट्टी हो जाएगा लेकर घर चले जाइयेगा लेकिन फिर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
कोई लापरवाही नहीं होगा डॉक्टर साहब।
दवा लेट खाने की वजह से इनका शुगर लेवल बढ़ गया था जिसकी वजह से आपके पिता जी इतनी देर तक बेहोश थे।
क्या हुआ बेटा।
पापा कल शाम 3 बजे छुट्टी हो जाएगा।
चलो राजू खुश हो जाएगा।
लेकिन एक और बात पापा चाहे जो करना हो कीजियेगा लेकिन टाइम से दवा,टाइम खाना खाइएगा मीठा एकदम मत खाना।
बेटा कान पकड़ रहा हुँ अब कोई लापरवाही नहीं होगा।
हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद दादा जी घर पर आ चुके है,दादा जी अपने कमरे में जाकर सो जाते है।

राजू गार्डन में अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता है राजू जाओ देखो तुम्हारे घर कौन आया है राजू बैट फेंककर घर दौड़ा चला आता है और हांफते हुए अपने पिता जी से पूछता है-पापा,पापा,आप ड्यूटी से इतनी जल्दी कैसे।
बेटा तुम्हारा आज बर्थ डे है ना अंदर जाकर देखो कौन आया है।
दादी तुम आ गयी,किसके साथ आयी।
राजू ये लो चॉकलेट,तुम्हारे पापा,बुआ के घर गए थे मुझे और तुम्हारे दादा जी को घर ले आये।
दादा जी उठिये आज मेरा बर्थ डे है मार्केट चलिए अपनी स्कूटी से कुछ खरीदना है।
राजू पापा के साथ चले जाओ मुझे आराम करने दो।
नहीं आपको चलना होगा दादा जी।
राजू दादा जी को परेशान मत करो।
बेटा राजू को मार्केट लेकर चले जाओ,ये जो भी आज खरीदने को बोले खरीद दो।
जाओ,राजू पापा के साथ।
चलो राजू।
राजु अपने पापा के साथ बाइक पर बैठकर मार्केट पहुंच जाता है तभी उसकी नजर पेड़ो की दुकान पर पड़ता है पापा,पापा उस पेड़ की दुकान पर चलिए।
वहां क्या करोगे जाकर तुम्हारी पसंद का केक भी तो खरीदना है।
नहीं पापा अब आज से मैं एक नई शुरुआत करूँगा अपने हर बर्थडे पर केक काटूंगा नहीं,पेड़ लगाऊंगा।
पागलों जैसी क्या बात कर रहे हो बेटा तुम्हारे दोस्त बर्थडे में आएंगे जब देखेंगे की तुम केक नहीं काट रहे,पेड़ लगा रहे हो तुम्हारा मजाक उड़ाएंगे।
मुझे कोई परवाह नहीं है पापा।
तुम्हारा बर्थडे है इसलिए तुम्हारी बातों को मान गया नहीं तो,मैं ये सब तुमको नहीं करने देता,भईया एक पेड़ दे दो।
कौन सा पेड़ लेंगे भईया बताइये।
कोई भी दे दीजिये।
पापा रुको मैं बताता हुं पांच पेड़ दे दीजिये अंकल जी,एक नीम का ,एक पीपल का,एक आम का,दो फूलों के पेड़ दे दीजिये।
अरे बेटा इतने पेड़ लेकर क्या करोगे एक ही ले लो।
पापा आज मैं कितने साल का हो जाऊंगा।
पांच साल का बेटा अपने हर बर्थ डे पर मैं जितने वर्स का हो होता जाऊंगा उतने ही मैं पेड़ लगाऊंगा।
जैसी तुम्हारी मर्जी राजु,कितने रुपये हुए भईया।
100 रुपये दे दीजिये।

राजू पेड़ लिए अपने पिता जी के साथ घर चला जाता है घर पहुंचने पर राजू अपने पिता से पेड़ खरीदने की बात किसी से नहीं कहने को कहता है-नहीं कहूंगा बेटा।

राजू तुम मार्केट किसलिए गए थे आज तुम्हारा बर्थडे है केक लेकर नहीं आये,केक कहाँ पर है राजू।
राजू हंसते हुए कहता है मां सरप्राइज है,देखना आज मेरा बर्थ डे सबसे स्पेशल होगा।
देखती हुँ बेटा कैसा बर्थ डे होगा तुम्हारा,केक वेक लाये नहीं स्पेसल बर्थ डे होगा।

रात के साढ़े सात बज चुकें है राजू के सभी दोस्त सभी पड़ोसी इंतजार में रहते है राजू कब आये केक काटे राजू के मास्टर जी बर्थ डे में आये हुए है।
पूरा घर अंदर बाहर से झालर से जगमगा रहा है।

राजू को बुलाइये केक काटे कहाँ है।
आ रहा है राजू,मास्टर जी थोड़ा इंतजार कीजिये।

राजू कपड़े पहनकर अपने दादा जी के साथ हाल रूम में आ जाता है राजू के दोस्त पूछते है राजू तुम्हारा केक कहाँ पर है राजू सभी लोगों से बाहर जाने को कहता है सभी राजू की बात सुनकर बाहर चले आते है सभी हैरान है।
राजू क्या करने वाला है केक काटने की बजाय सभी को बाहर ले आया राजू ने अपने पिता जी से फावड़े से गढा खोदने को कहता है उसके पिता जी गढे को खोदकर फावड़े को एक तरफ रख देते है,दादा जी को कुछ समझ नहीं आता है हर साल अपने बर्थ डे पर केक काटता है लेकिन इस बार ये क्या कर रहा है राजू तुम क्या कर रहे हो,रुकिए दादा जी मैं क्या करने वाला हुँ आपको पता चल जाएगा,सभी हैरान परेशान है ये राजू क्या करने वाला है।राजू अपने कमरे से हाथों में पेड़ लिए बाहर आ जाता है खोदे हुए पांच गढो में राजू पेड़ो को लगाकर मिट्टी से अच्छी तरह ढक देता है,सभी के सामने अपनी पूरी बात कहता है मेरे लिए मेरा यही केक है मैं अपने हर बर्थ डे पर जितने वर्स का हो जाऊंगा उतने ही पेड़ लगाऊंगा राजू की बातें सुनकर दादा जी और मास्टर जी जोरों से तालियां बजाते हुए राजू की इतनी बड़ी कोशिश को देखकर प्रसन्न हो जाते है और वहां पर खड़े सभी लोग राजू की खूब वाहवाही करते है।